Saturday, August 29, 2026

यादें बचपन की

 

यादें बचपन की

कभी-कभी दिल के किसी कोने से
एक आवाज़ सी आती है,
बीते हुए उन सुनहरे दिनों की
याद बहुत सताती है।

वो सुबह बिना किसी चिंता के,
वो शाम दोस्तों के नाम,
छोटी-छोटी खुशियों में बसता था
अपना पूरा जहान।

Friday, August 28, 2026

सिंह और चतुर खरगोश

 

सिंह और चतुर खरगोश

बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में एक शक्तिशाली सिंह रहता था।

वह इतना बलवान था कि जंगल के सभी जानवर उससे डरते थे। सिंह रोज शिकार करता और अपनी भूख मिटाने के लिए कई-कई जानवरों को मार देता।

धीरे-धीरे जंगल के जानवरों की संख्या कम होने लगी।

एक दिन सभी जानवर एक जगह इकट्ठा हुए। उनके चेहरों पर डर साफ दिखाई दे रहा था।

एक बूढ़े हिरण ने कहा,

“अगर सिंह इसी तरह रोज कई जानवरों का शिकार करता रहा, तो एक दिन इस जंगल में कोई जानवर नहीं बचेगा।”

बहुत विचार-विमर्श के बाद सभी जानवरों ने सिंह के पास जाकर एक प्रस्ताव रखने का फैसला किया।

अगले दिन जानवर सिंह के सामने पहुँचे।

सिंह ने गरजकर पूछा,

“तुम सब यहाँ क्यों आए हो?”

जानवरों ने विनम्रता से कहा,

Sunday, July 19, 2026

हे मेरे मनमीत — जीवन को सार्थक बनाने वाली कविता | स्व. विजय शंकर पाण्डेय

हे मेरे मनमीत — जीवन को सार्थक बनाने वाली कविता | स्व. विजय शंकर पाण्डेय

https://aapkikavitae.blogspot.com/2020/04/blog-post_25.html

रचनाकार: स्व. विजय शंकर पाण्डेय

प्रस्तुति एवं भावार्थ: परिवार के अभिलेख से

नोट: नीचे दी गई कविता स्व. विजय शंकर पाण्डेय की मूल हस्तलिखित रचना के आधार पर प्रस्तुत की जा रही है। भाषा की काव्यात्मक शैली और मूल शब्दों को यथासंभव उसी रूप में रखा गया है। भावार्थ पाठकों की सुविधा के लिए सरल हिन्दी में प्रस्तुत किया गया है।

हे मेरे मनमीत

हे मेरे मन मीत जन्म नहीं व्यर्थ करो।
बीतजाय ये जन्म अकारथ, ऐसा नहीं अनर्थकरो।।

हँसत हँस जीना, खाना बस इतना हो नहीं जीवन।
लाख लाख का अंग मिला, मत समझो ईश दीवानापन।।

दाता इनका ईश-जगत का, माया उनकी बड़ा प्रबल।
माया में हो डूब गया तो, जीवन हेतु हुआ असफल।।

Saturday, February 7, 2026

पेंशन : सबसे वफादार प्रेमिका - G D Pandey

  पेंशन : सबसे वफादार प्रेमिका (हँसते-हँसते सच)

जब बाल

काले से सीधे “चाँदी संस्करण” में बदल जाएँ,

घुटने हर कदम पर

“कट-कट-कट” की रिंगटोन बजाने लगें,

और चश्मा न हो तो

दुनिया 4K नहीं…

बस धुंधली सी कविता लगे—

तब दफ्तर कहता है,

“धन्यवाद, अब आप घर पर आराम कीजिए।”

लेकिन तभी

एक आवाज़ आती है—

न बॉस की,

न HR की—

“अरे हीरो!

मैं हूँ न…”

उस आवाज़ का नाम है—

पेंशन!

वाह!

क्या प्रेमिका है ये,

न वॉट्सऐप पर ब्लू-टिक का झगड़ा,

न ‘आज मूड नहीं है’ का ड्रामा,

हर महीने तय तारीख को

सीधे अकाउंट में एंट्री—

“डार्लिंग,

मैं आ गई…

पूरे महीने का खर्चा लेकर!”

ये न छुट्टी लेती है,

न इस्तीफ़ा देती है,

न कभी कहती है—

“बजट टाइट है, बाद में बात करेंगे।”

ये तो ऐसी संस्कारी नायिका है

जो बिना बोले कह देती है—

“चाय मैं पिलाऊँगी,

दवा भी मैं ही दिलाऊँगी।”

जवानी की नौकरी

पहली मोहब्बत जैसी होती है—

जोश में शुरू,

टारगेट में उलझी,

और आख़िर में

“अब आगे नहीं बनती” कहकर विदा।

लेकिन पेंशन?

वो तो

शादी के बाद वाली समझदार पत्नी है—

कम बोले,

ज़्यादा निभाए,

और हर महीने

राशन का इंतज़ाम कर जाए।

शाम को जब

चाय, बिस्किट

और पुराने दर्द साथ बैठते हैं,

पेंशन पास आकर कहती है—

“डरो मत,

बुढ़ापा है, बीमारी नहीं।

मैं हूँ न—

EMI भी संभाल लूँगी,

और मन भी।”

तब समझ में आता है—

सैलरी थी

तेज़ रफ्तार वाली प्रेमिका,

पर पेंशन है

जीवन की असली हीरोइन।

जो आख़िरी सीन तक

साथ निभाती है

और फिल्म के अंत में

लिख देती है—

“The End –

With Monthly Support.”

बस साल में एक बार

नवम्बर आता है,

और सरकार पूछती है—

“ज़िंदा हो न?”

हम मुस्कराकर कहते हैं—

“हाँ जी,

पेंशन है न…

तो दिल भी धड़क रहा है!” 😄

G D Pandey 

Saturday, August 30, 2025

Book - महान भारतीय संत भाग 1 - त्रैलंग स्वामी

 

महान भारतीय संत

भाग 1

त्रैलंग स्वामी

शिव के अवतार की जीवनी

लेखक: जी डी पाण्डेय

प्रथम संस्करण : 2025 

कॉपीराइट © 2025 जी. डी. पाण्डेय 

सर्वाधिकार सुरक्षित। 

इस पुस्तक का कोई भी अंश, किसी भी रूप, माध्यम या तकनीक — चाहे प्रिंट, डिजिटल, ऑडियो या वीडियो — लेखक की पूर्व लिखित अनुमति के बिना पुनः प्रस्तुत, संग्रहीत या प्रसारित नहीं किया जा सकता। 

यह पुस्तक केवल व्यक्तिगत, शैक्षिक एवं आध्यात्मिक उपयोग हेतु है।

समर्पण

यह ग्रंथ उन सभी

साधकों, श्रद्धालुओं और सत्य-प्रेमी आत्माओं को समर्पित है,

जो जीवन की अनंत यात्रा में
अडिग संकल्प और निर्मल हृदय के साथ
परम सत्य की खोज में निरंतर अग्रसर हैं।

उन चरणों में अर्पित,

जिनसे मानवता ने करुणा, त्याग और आत्मज्ञान की ज्योति पाई।

त्रैलंग स्वामी के अद्भुत जीवन और उपदेश
उन सभी के पथ को आलोकित करें
जो आत्मा की मुक्ति और ईश्वर के साक्षात्कार के लिए जीवन को एक साधना बना चुके हैं।


 

प्रस्तावना

भारतीय अध्यात्म के विराट आकाश में अनेक संत, महात्मा और योगी ऐसे हुए हैं, जिनकी जीवन-गाथा केवल प्रेरणा ही नहीं, बल्कि आत्मा के लिए जागरण का शंखनाद है। इन दिव्य आत्माओं में त्रैलंग स्वामी का स्थान अद्वितीय और अलौकिक है।

त्रैलंग स्वामी को अनेक श्रद्धालु शिव का अवतार मानते हैं। उनका जीवन किसी एक युग, जाति या परंपरा की सीमाओं में बंधा नहीं था। वे सनातन धर्म के उस शाश्वत स्वरूप का साक्षात् अनुभव थे, जिसमें भक्ति, ज्ञान और योग एक हो जाते हैं।

उनका तप, उनकी करुणा और उनकी अलौकिक शक्तियाँ न केवल तत्कालीन समाज के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक बनीं। उनका हर उपदेश, हर मौन और हर आशीर्वाद, साधना के मार्ग पर चलने वाले के लिए दीपस्तंभ की तरह है।

Tuesday, July 22, 2025

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